History of the Making of the Indian Constitution

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 History of the Making of the Indian Constitution


1. Meaning of Constitution (संविधान का अर्थ)

Constitution (संविधान) किसी भी देश का सर्वोच्च कानून (Supreme Law of the Land) होता है। यह एक ऐसा कानूनी दस्तावेज़ है जो देश के शासन की पूरी व्यवस्था तय करता है।

संविधान क्यों आवश्यक है?

संविधान यह निर्धारित करता है:

  • सरकार का गठन कैसे होगा।
  • सरकार की तीनों शाखाओं (विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका) की शक्तियाँ और सीमाएँ क्या होंगी।
  • नागरिकों के अधिकार और कर्तव्य क्या होंगे।
  • केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन कैसे होगा।
  • कानून बनाने की प्रक्रिया क्या होगी।
  • संविधान में संशोधन कैसे होगा।

उदाहरण:
यदि संसद ऐसा कानून बनाए जो सभी नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता समाप्त कर दे, तो सर्वोच्च न्यायालय उसे संविधान के विरुद्ध घोषित कर सकता है। इससे स्पष्ट है कि संविधान सरकार से भी ऊपर है।

संविधान की प्रमुख विशेषताएँ

  • सर्वोच्च कानून
  • सरकार की शक्तियों को सीमित करता है।
  • नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है।
  • लोकतंत्र को मजबूत बनाता है।
  • न्याय, समानता और स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है।

2. Historical Background (ऐतिहासिक पृष्ठभूमि)

भारतीय संविधान एक दिन में नहीं बना। लगभग 175 वर्षों के संवैधानिक विकास का परिणाम है।

(A) Regulating Act, 1773

यह ब्रिटिश संसद द्वारा पारित पहला महत्वपूर्ण कानून था।

मुख्य प्रावधान

  • बंगाल के गवर्नर को Governor-General of Bengal बनाया गया।
  • Warren Hastings पहले गवर्नर-जनरल बने।
  • कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना (1774) का मार्ग प्रशस्त हुआ।
  • ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासन पर ब्रिटिश संसद का नियंत्रण शुरू हुआ।

महत्व

  • भारत में केंद्रीकृत प्रशासन की शुरुआत।
  • ब्रिटिश संसद ने पहली बार भारत के प्रशासन में सीधे हस्तक्षेप किया।

(B) Pitt's India Act, 1784

इस अधिनियम ने ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिश सरकार के बीच शक्तियों का बंटवारा किया।

मुख्य प्रावधान

  • Board of Control की स्थापना।
  • कंपनी व्यापार करती रही, लेकिन राजनीतिक नियंत्रण ब्रिटिश सरकार के हाथ में आ गया।
  • भारत के प्रशासन पर ब्रिटिश सरकार का प्रभाव बढ़ा।

महत्व

यहीं से भारत का प्रशासनिक नियंत्रण धीरे-धीरे पूरी तरह ब्रिटिश सरकार के अधीन आने लगा।


(C) Government of India Act, 1858

1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद यह अधिनियम पारित किया गया।

मुख्य प्रावधान

  • ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त हुआ।
  • भारत सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन आ गया।
  • भारत सचिव (Secretary of State for India) का पद बनाया गया।
  • गवर्नर-जनरल को वायसराय (Viceroy) भी कहा जाने लगा।

महत्व

  • भारत में ब्रिटिश शासन का नया चरण शुरू हुआ।
  • प्रशासन अधिक केंद्रीकृत हुआ।

(D) Morley–Minto Reforms, 1909

इसे Indian Councils Act, 1909 भी कहा जाता है।

मुख्य प्रावधान

  • विधायी परिषदों का विस्तार।
  • सीमित चुनाव प्रणाली की शुरुआत।
  • मुसलमानों के लिए Separate Electorates (पृथक निर्वाचन क्षेत्र) की व्यवस्था।

महत्व

  • पहली बार चुनाव की व्यवस्था आई।
  • लेकिन पृथक निर्वाचन व्यवस्था ने साम्प्रदायिक राजनीति को बढ़ावा दिया।

(E) Montagu–Chelmsford Reforms, 1919

इसे Government of India Act, 1919 भी कहा जाता है।

मुख्य प्रावधान

  • प्रांतों में Dyarchy (द्वैध शासन) लागू किया गया।
  • कुछ विषय भारतीय मंत्रियों को दिए गए, जबकि महत्वपूर्ण विषय ब्रिटिश अधिकारियों के पास रहे।
  • केंद्र और प्रांतों के बीच शक्तियों का प्रारंभिक विभाजन हुआ।

Dyarchy क्या है?

प्रांतीय विषयों को दो भागों में बाँटा गया:

  • Transferred Subjects: शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि (भारतीय मंत्रियों के अधीन)
  • Reserved Subjects: पुलिस, कानून-व्यवस्था, वित्त (ब्रिटिश अधिकारियों के अधीन)

महत्व

  • भारतीयों की प्रशासन में भागीदारी बढ़ी।
  • हालांकि वास्तविक शक्ति ब्रिटिश सरकार के पास ही रही।

(F) Government of India Act, 1935

यह भारतीय संविधान का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।

मुख्य प्रावधान

  • संघीय शासन प्रणाली (Federal System)
  • केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन
  • प्रांतीय स्वायत्तता
  • संघीय न्यायालय (Federal Court)
  • लोक सेवा आयोग (Public Service Commission)
  • रिज़र्व बैंक की स्थापना का आधार

महत्व

भारतीय संविधान के अनेक प्रावधान इसी अधिनियम से लिए गए। इसलिए इसे संविधान का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत कहा जाता है।


3. Constituent Assembly (संविधान सभा)

संविधान सभा की आवश्यकता

स्वतंत्र भारत का संविधान भारतीयों द्वारा ही बनाया जाए, इसलिए संविधान सभा का गठन किया गया।

गठन का इतिहास

  • 1934: एम. एन. रॉय ने संविधान सभा का विचार दिया।
  • 1935: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इसकी मांग की।
  • 1940 (August Offer): ब्रिटिश सरकार ने सिद्धांततः स्वीकार किया।
  • 1942 (Cripps Mission): संविधान सभा का प्रस्ताव दोहराया गया।
  • 1946: कैबिनेट मिशन योजना के तहत संविधान सभा बनी।

पहली बैठक

  • 9 दिसंबर 1946
  • अस्थायी अध्यक्ष: डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा

स्थायी अध्यक्ष

  • 11 दिसंबर 1946
  • डॉ. राजेंद्र प्रसाद

सदस्य

  • प्रारंभ में: 389
  • विभाजन के बाद: 299

प्रमुख समितियाँ

  • Drafting Committee
  • Union Powers Committee
  • Union Constitution Committee
  • Provincial Constitution Committee
  • Advisory Committee

4. Drafting Committee (प्रारूप समिति)

गठन

29 अगस्त 1947

अध्यक्ष

Dr. B. R. Ambedkar

मुख्य कार्य

  • संविधान का प्रारूप तैयार करना।
  • विभिन्न समितियों की रिपोर्टों का समन्वय करना।
  • कानूनी भाषा तैयार करना।
  • सभी सुझावों को अंतिम रूप देना।

संविधान निर्माण में समय

  • 2 वर्ष 11 माह 18 दिन
  • 11 सत्र
  • 165 बैठक दिवस

अंगीकरण

  • 26 नवंबर 1949

लागू

  • 26 जनवरी 1950

26 जनवरी क्यों?
क्योंकि 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज (Purna Swaraj) का संकल्प लिया था।


5. Sources of the Indian Constitution (भारतीय संविधान के स्रोत)

भारतीय संविधान दुनिया के कई देशों के संविधानों से प्रेरित है, लेकिन इसकी अपनी विशिष्ट पहचान भी है।

देश

भारत ने क्या अपनाया

Britain (यू.के.)

संसदीय शासन प्रणाली, मंत्रिमंडलीय प्रणाली, Rule of Law, एकल नागरिकता

USA (अमेरिका)

मौलिक अधिकार (Fundamental Rights), न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review), राष्ट्रपति के महाभियोग की प्रक्रिया

Ireland

राज्य के नीति-निर्देशक तत्व (Directive Principles of State Policy), राष्ट्रपति के निर्वाचन की कुछ व्यवस्थाएँ

Canada

मजबूत केंद्र के साथ संघीय व्यवस्था, अवशिष्ट शक्तियाँ (Residuary Powers) केंद्र को

Australia

समवर्ती सूची (Concurrent List), व्यापार एवं वाणिज्य की स्वतंत्रता

Germany (Weimar Constitution)

आपातकालीन प्रावधान (Emergency Provisions)

USSR (Russia)

मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties), सामाजिक-आर्थिक न्याय की प्रेरणा


निष्कर्ष

भारतीय संविधान विश्व का सबसे विस्तृत लिखित संविधान है। यह केवल शासन चलाने का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता का आधार है। संविधान का निर्माण लंबे ऐतिहासिक विकास, स्वतंत्रता आंदोलन के अनुभवों और विभिन्न देशों के संवैधानिक सिद्धांतों से प्रेरणा लेकर किया गया, जिससे यह भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप एक सशक्त और जीवंत संविधान बन सका।

 

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